Friday, 25 May 2018

Sachi He Dosti Aazma Ke Dekhlo


जब आरजूएं फैलकर इक दाम बन गईं


रोज़ आता है मेरे दिल को तस्सली दे


मैंने अपने हाथ से तोड़े हैं पैमाने बहुत


मुझे जिस दम खयाले-नर्गिसे-मस्ताना आता


तस्वीर में ख्याल होना तो लाज़मी सा


गुफ्तगू हो न हो ख्याल तेरा ही रहता