Wednesday, 23 May 2018

एक बार अपनी आँखों से पिला दे साकी


हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर


नशे मे तो वो और भी याद आने लगे


आज अंगूर की बेटी से मोहब्बत कर ले


ऐसा डूबा तेरी आँखों की गहराई में


यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती


फिर भी पी लेता अगर वो शराब होती